Street Light Issue
Street Light Issue : रायपुर/बिलासपुर/अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का दावा कागजों पर भले ही मजबूत दिखे, लेकिन धरातल पर शाम होते ही हकीकत कुछ और ही नजर आती है। प्रदेश के लगभग सभी बड़े नगर निगमों—चाहे वह राजधानी रायपुर हो, बिलासपुर हो या फिर सरगुजा का केंद्र अम्बिकापुर—हर जगह स्ट्रीट लाइटों की बदहाली ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है।
Street Light Issue : प्रमुख सड़कों पर ‘अंधेरगर्दी’ का आलम
प्रदेश के नेशनल हाईवे से लेकर मुख्य रिंग रोड और कॉलोनियों की आंतरिक सड़कों पर लगीं एलईडी लाइटें (LED Lights) शोपीस बनकर रह गई हैं। शाम ढलते ही जब ट्रैफिक का दबाव चरम पर होता है, तब सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। इससे न केवल वाहन चालकों को परेशानी होती है, बल्कि पैदल चलने वाले राहगीर भी असुरक्षित महसूस करते हैं।
अंधेरे के बीच ‘मौत का जाल’ बनते आवारा मवेशी
पूरे छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की समस्या गंभीर है। रात के अंधेरे में स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण सड़क के बीच बैठे मवेशी वाहन चालकों को नजर नहीं आते। हाल के दिनों में रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जैसे शहरों से ऐसी कई खबरें आई हैं जहाँ अंधेरे के कारण मवेशियों से टकराकर वाहन चालक अपनी जान गंवा चुके हैं।
असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित पनाहगाह
शहरों के अंधेरे कोने अब नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के अड्डे बनते जा रहे हैं। खासकर वार्डों की आंतरिक गलियों में रोशनी न होने से चैन स्नैचिंग, मोबाइल लूट और छेड़खानी जैसी घटनाओं का ग्राफ बढ़ा है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए शाम के बाद घर से निकलना एक चुनौती बन गया है।
मेंटेनेंस के नाम पर केवल खानापूर्ति
नगर निगमों द्वारा हर साल स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकांश जगहों पर सेंसर खराब हैं या फिर समय पर मरम्मत नहीं की जाती। बिजली विभाग और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जनता की मांग: बिजली का बिल पूरा, तो सुविधा क्यों अधूरी?
नागरिकों का सवाल है कि जब वे नियमित रूप से टैक्स और बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, तो उन्हें सुरक्षित और रोशन सड़कें क्यों नहीं मिल रहीं? शासन-प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है ताकि प्रदेश की सड़कों पर हादसों का अंधेरा खत्म हो सके।