OnePlus
Pete Lau Arrest Warrant Taiwan : नई दिल्ली। स्मार्टफोन की दुनिया के दिग्गज ब्रांड OnePlus के सीईओ पीट लाउ (Pete Lau) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ताइवान के अभियोजकों (Prosecutors) ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। लाउ पर आरोप है कि उन्होंने ताइवान में एक अवैध ‘हायरिंग ऑपरेशन’ चलाया और नियमों को ताक पर रखकर पिछले दस सालों में द्वीप के 70 से ज्यादा कुशल इंजीनियरों को चुपचाप अपनी कंपनी में शामिल कर लिया।
क्या है पूरा मामला और आरोप?
शिलिन डिस्ट्रिक्ट प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने लाउ के खिलाफ ताइवान के ‘क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट’ के तहत आरोप दर्ज किए हैं। यह कानून तय करता है कि मुख्य भूमि चीन की कंपनियां ताइवान में किस तरह कामकाज और भर्ती कर सकती हैं। जांच में सामने आया है कि OnePlus ने कथित तौर पर हांगकांग में एक अलग नाम से एक ‘शेल कंपनी’ बनाई ताकि अधिकारियों की नजरों से बचा जा सके।
आरोप है कि साल 2015 में बिना किसी सरकारी मंजूरी के ताइवान में एक गुप्त ब्रांच खोली गई। यह टीम स्मार्टफोन सॉफ्टवेयर, टेस्टिंग और वेरिफिकेशन जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी काम देख रही थी। ताइवानी कानून के मुताबिक, किसी भी चीनी कंपनी को वहां से टैलेंट भर्ती करने के लिए सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती है, जिसे लाउ ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
ताइवान की ‘टैलेंट हंट’ पर सख्त नजर
ताइवान अपनी सेमीकंडक्टर तकनीक और इंजीनियरिंग टैलेंट को अपनी ‘राष्ट्रीय संपत्ति’ मानता है। हाल के दिनों में ताइवान सरकार उन चीनी टेक कंपनियों के खिलाफ बेहद आक्रामक हो गई है, जो उसके इंजीनियरों को लुभाकर या गुप्त तरीके से भर्ती कर रही हैं। ताइवान इसे ‘टैलेंट की चोरी’ के रूप में देखता है।
अकेले पिछले साल अगस्त में अधिकारियों ने ऐसी 16 चीनी कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की थी। इससे पहले साल 2025 में Apple सप्लायर ‘लक्सशेयर प्रिसिजन’ की चेयरपर्सन ग्रेस वांग के खिलाफ भी इसी तरह का वारंट जारी हो चुका है। पीट लाउ का मामला इसी कड़े अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
कौन हैं पीट लाउ?
पीट लाउ टेक इंडस्ट्री का एक बहुत बड़ा नाम हैं। उन्होंने OnePlus की सह-स्थापना की और इसे दुनिया के प्रीमियम स्मार्टफोन ब्रांड्स की कतार में खड़ा किया। वर्तमान में वह Oppo के प्रोडक्ट डिवीजन के प्रमुख भी हैं। 2021 में ही OnePlus का Oppo के साथ विलय हुआ था और इसे एक स्वतंत्र सब-ब्रांड बनाया गया था। अब इस वारंट के बाद लाउ और उनकी कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कामकाज पर गहरा असर पड़ सकता है।