AI Grading System : बीजिंग/शंघाई। चीन अपनी शिक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए एक ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां अब टीचरों को कॉपियां चेक करने के लिए घंटों पसीना नहीं बहाना पड़ता। चीन के बड़े शहरों के स्कूलों में अब ‘AI ग्रेडिंग सिस्टम’ का इस्तेमाल हो रहा है, जो छात्रों के हाथ से लिखे (Handwritten) होमवर्क को कुछ ही सेकंड में स्कैन कर नंबर और फीडबैक दोनों दे रहा है।
कैसे काम करता है यह जादुई सिस्टम?
यह तकनीक ‘एडवांस न्यूरल नेटवर्क’ पर आधारित है। जब कोई छात्र अपनी कॉपी को इस एआई डिवाइस (जैसे iFlytek का SPARK AI Grader) के नीचे रखता है, तो सिस्टम पलक झपकते ही पूरी कॉपी को स्कैन कर लेता है।
गलतियों की पहचान: एआई गलत जवाबों को लाल निशान से चिन्हित करता है।
सटीक मूल्यांकन: यह न केवल सही-गलत बताता है, बल्कि हर सवाल पर विस्तार से टिप्पणी (Comment) भी लिखता है कि छात्र ने कहां सुधार करना है।
सुपरफास्ट स्पीड: चीन की टेक कंपनियां दावा करती हैं कि उनके डिवाइस एक मिनट में करीब 26 पन्नों की जांच कर सकते हैं।
शंघाई और बीजिंग जैसे शहरों में शुरुआत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शंघाई के सैकड़ों स्कूलों में यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो चुका है। इसके अलावा बीजिंग सहित कई अन्य प्रांतों के लगभग 110 से ज्यादा स्कूलों में एआई आधारित मूल्यांकन प्रणाली का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। इससे शिक्षकों का कार्यभार 50 प्रतिशत तक कम हो गया है, जिससे वे पढ़ाने और नए टीचिंग तरीकों पर ज्यादा समय दे पा रहे हैं।
क्या टीचरों की हो जाएगी छुट्टी?
भले ही एआई गणित और विज्ञान जैसे विषयों में सटीक नंबर दे रहा है, लेकिन निबंध (Essay) और रचनात्मक कार्यों (Creative Writing) में अभी भी इंसानी दिमाग की जरूरत बनी हुई है। भावनाओं और रचनात्मकता को समझने में एआई अभी उतना परिपक्व नहीं है, इसलिए इन क्षेत्रों में शिक्षकों की भूमिका आज भी सबसे अहम है।
चुनौतियां भी कम नहीं
जहाँ एक तरफ बड़े शहरों में तकनीक का बोलबाला है, वहीं चीन के ग्रामीण इलाकों में संसाधनों और फंड की कमी के कारण इस सिस्टम को लागू करना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही, एआई को सही तरीके से संचालित करने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम शिक्षकों की कमी भी महसूस की जा रही है। फिर भी, चीन का यह कदम भविष्य की वैश्विक शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी नजीर पेश कर रहा है।