रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन तहसीलदार, अभनपुर) और लखेश्वर प्रसाद किरण (तत्कालीन नायब तहसीलदार, गोबरा नवापारा) शामिल हैं। इन पर पद का दुरुपयोग कर कूटरचित दस्तावेजों के जरिए शासन को लगभग 43 करोड़ रुपये का चूना लगाने का संगीन आरोप है।
EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि रायपुर-विशाखापट्नम और दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में इन अधिकारियों ने भू-माफियाओं और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मिलकर एक बड़ा आपराधिक षड्यंत्र रचा। फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार कर चहेते भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई गई। फरार चल रहे इन दोनों अधिकारियों की जमानत याचिका उच्चतम न्यायालय ने भी खारिज कर दी थी, जिसके बाद विशेष टीम ने इन्हें 11 फरवरी को धर दबोचा।
फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे सघन पूछताछ की जा रही है। खास बात यह है कि इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी ट्रेल की समानांतर जांच कर रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायालय में आरोपियों की संपत्ति कुर्की की प्रक्रिया भी विचाराधीन है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में कई अन्य बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद है।