Copper Price Today : नई दिल्ली : कमोडिटी मार्केट में इन दिनों सोना-चांदी नहीं, बल्कि कॉपर (तांबा) सुर्खियों में है। पिछले एक साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न देने के बाद अब इसे ‘अगला मार्केट किंग’ कहा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह दुनिया भविष्य की तकनीकों की ओर बढ़ रही है, कॉपर की अहमियत सोने से कम नहीं रहने वाली है।
AI और इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनीं गेम चेंजर
कॉपर की डिमांड में अचानक आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) का है। भारत में चल रहे ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में यह बात सामने आई है कि डेटा सेंटर्स को सामान्य सर्वर्स के मुकाबले 30 से 50 गुना ज्यादा कॉपर की जरूरत होती है।
पावर ग्रिड: रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) के विस्तार में कॉपर अनिवार्य है।
EV सेक्टर: एक इलेक्ट्रिक कार में पारंपरिक कार की तुलना में कई गुना ज्यादा कॉपर वायरिंग का इस्तेमाल होता है।
डेटा सेंटर: गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक सिर्फ AI सेक्टर को ही सालाना 5 लाख मीट्रिक टन कॉपर की जरूरत होगी।
सप्लाई में कमी से बढ़ी कीमतें
एक तरफ मांग आसमान छू रही है, वहीं दूसरी ओर सप्लाई सुस्त है। दुनिया भर की पुरानी खदानों में उत्पादन कम हो गया है और नए माइनिंग प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में समय लग रहा है। फिलहाल चीन के बाजारों में लूनर न्यू ईयर की वजह से थोड़ी शांति है, लेकिन 23 फरवरी के बाद वहां बाजार खुलते ही कीमतों में एक और उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आज का ताजा भाव
वर्तमान में इंटरनेशनल मार्केट (COMEX) पर कॉपर का प्राइस लगभग $5.67 प्रति पाउंड के स्तर पर है। वहीं, भारतीय बाजार (MCX) में यह Rs. 1154.80 प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। पिछले एक साल के ग्राफ को देखें तो इसने कई पारंपरिक निवेश विकल्पों को पीछे छोड़ दिया है।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार जानकारों का कहना है कि कॉपर अब महज एक औद्योगिक धातु (Industrial Metal) नहीं रह गया है, बल्कि एक मजबूत लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट बन चुका है। हालांकि, कमोडिटी मार्केट में जोखिम हमेशा रहता है, इसलिए छोटे निवेशकों को बाजार की चाल और ग्लोबल सप्लाई चेन पर नजर रखकर ही निवेश करना चाहिए।