Digital Detox Trend Youth : स्पेशल खबर : सर्द हवाओं के बीच हाथ में चाय का कुल्हड़ और अपनों से ढेर सारी बातें… कुछ समय पहले तक यह अंबिकापुर की शामों का जाना-पहचाना नजारा था। लेकिन बीते कुछ वर्षों में ‘स्मार्टफोन’ ने इस सुकून के बीच अपनी जगह बना ली थी। हालांकि, अब एक सुखद बदलाव देखने को मिल रहा है। शहर के युवा अब स्क्रीन की चकाचौंध को छोड़कर ‘डिजिटल डिटॉक्स’ (Digital Detox) यानी मोबाइल से दूरी बनाने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
Digital Detox Trend Youth : क्या है ‘डिजिटल फास्टिंग’ का ट्रेंड?
डिजिटल फास्टिंग का सीधा मतलब है—एक निश्चित समय के लिए इंटरनेट, सोशल मीडिया और स्मार्टफोन से पूरी तरह दूरी बना लेना। अंबिकापुर के गांधी चौक, चौपाटी और घड़ी चौक के पास स्थित कैफे में अब ऐसे युवाओं की टोली दिखने लगी है, जो टेबल पर बैठते ही अपना फोन ‘साइलेंट’ कर एक तरफ रख देते हैं। इनका उद्देश्य वर्चुअल दुनिया की ‘रील’ से बाहर निकलकर असल जिंदगी की ‘फील’ को महसूस करना है।
क्यों महसूस हुई इसकी जरूरत?
शहर के मनोचिकित्सकों का मानना है कि शाम के वक्त लगातार रील स्क्रॉल करने से ‘डोपामाइन’ का स्तर बिगड़ता है, जिससे अनिद्रा और तनाव बढ़ता है। अंबिकापुर के पीजी कॉलेज के छात्र आयुष बताते हैं, “हम दोस्तों के साथ बैठकर भी एक-दूसरे को मीम्स भेज रहे होते थे। अब हमने नियम बनाया है कि शाम 6 से 8 बजे के बीच कोई फोन टच नहीं करेगा। यकीन मानिए, चाय का स्वाद अब पहले से बेहतर लगने लगा है।”
सर्दियों की शाम और असल संवाद की वापसी
अंबिकापुर की कड़ाके की ठंड इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रही है। अलाव के पास बैठकर या कैफे की गर्माहट में लोग अब नोटिफिकेशन की आवाज के बजाय दोस्तों की हंसी सुनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सोशल कनेक्शन: लोग अब व्हाट्सएप स्टेटस के बजाय आमने-सामने बैठकर हाल-चाल पूछ रहे हैं।
मानसिक शांति: डिजिटल शोर कम होने से युवाओं में एकाग्रता बढ़ रही है।
प्रकृति से जुड़ाव: शाम को ऑक्सीजन पार्क या मैनपाट की वादियों में घूमने वाले सैलानी अब फोटो खींचने से ज्यादा नजारों को आंखों में कैद करने पर जोर दे रहे हैं।
कैसे शुरू करें अपनी ‘डिजिटल फास्टिंग’?
अगर आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो छोटे कदम उठा सकते हैं:
नो फोन जोन: शाम के भोजन या चाय के समय फोन को दूसरे कमरे में रखें।
नोटिफिकेशन ऑफ: जरूरी ऐप्स के अलावा बाकी सभी के नोटिफिकेशन बंद कर दें।
हॉबी पर ध्यान: फोन चलाने के बजाय कोई किताब पढ़ें या गिटार बजाएं।
निष्कर्ष: अंबिकापुर के युवाओं का यह ‘डिजिटल डिटॉक्स’ केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की ओर एक बड़ी छलांग है। तो क्या आज शाम आप भी अपनी चाय की चुस्की के साथ मोबाइल को थोड़ा आराम देंगे?