जगदलपुर
Jagdalpur Water Crisis : जगदलपुर: इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों ने पूरे देश को झकझोर दिया है, लेकिन छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में नगर निगम प्रशासन अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है। राज्य सरकार और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के सख्त निर्देशों के बावजूद, शहर के मुख्य फिल्टर प्लांट में पिछले डेढ़ साल से सफाई नहीं हुई है। यह लापरवाही कभी भी शहर में महामारी का रूप ले सकती है।
लाखों जिंदगियों से खिलवाड़: गंदगी के बीच पानी फिल्टर
शहर के पावर हाउस चौक पर स्थित फिल्टर प्लांट इंद्रावती नदी से पानी लेकर उसे शुद्ध करता है और करीब 30 हजार घरों तक पहुँचाता है। शहर की 60 प्रतिशत आबादी इसी प्लांट पर निर्भर है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्लांट के सेटलींग टैंक की सफाई पिछले 18 महीनों से नहीं की गई है। टैंक के भीतर गंदगी की मोटी परत जमी हुई है, जिससे फिल्टर होकर निकलने वाला पानी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
सरकार का अलर्ट, निगम की लापरवाही
इंदौर की घटना के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट कहा था कि पानी की शुद्धता में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बावजूद इसके, जगदलपुर नगर निगम ने कागजों पर तो सतर्कता दिखाई, लेकिन जमीन पर फिल्टर प्लांट की हालत जस की तस बनी हुई है। सफाई न होना केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि शहरवासियों की सेहत के साथ किया जा रहा सीधा जोखिम है।
सियासत गर्मायी: विपक्ष ने घेरा
इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस ने निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि इंदौर जैसे बड़े हादसे से भी जगदलपुर निगम ने कोई सबक नहीं लिया है और अधिकारियों की लापरवाही जनता की जान पर भारी पड़ सकती है। दूसरी ओर, निगम प्रशासन इन दावों को खारिज करते हुए खुद को अलर्ट मोड पर बता रहा है, लेकिन टैंक में जमी गंदगी प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।