नई दिल्ली | 7 फरवरी, 2026 भारत और अमेरिका के बीच आज एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Agreement) संपन्न हुआ। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस समझौते को “विकसित भारत 2047” की दिशा में एक स्वर्णिम अध्याय बताया। इस समझौते के तहत भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले दर्जनों प्रमुख उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (टैरिफ) नहीं लगेगा।
प्रमुख टैरिफ फ्री उत्पादों की सूची (0% Duty)
वाणिज्य मंत्री ने उन वस्तुओं की विस्तृत सूची साझा की, जो अब अमेरिकी बाजार में बिना किसी टैक्स के प्रवेश करेंगी:
रत्न एवं आभूषण: तराशे हुए हीरे (Diamonds), कीमती रत्न और आभूषण।
फार्मास्युटिकल: जेनेरिक दवाएं और सभी महत्वपूर्ण औषधीय उत्पाद।
टेक्नोलॉजी: स्मार्टफोन और विमान के पुर्जे (Aircraft Parts)।
कृषि और खाद्य उत्पाद: * चाय, कॉफी, मसाले और सूखे मेवे (काजू, ब्राजील नट्स)।
आम, केला, अमरूद और खट्टे फलों (Citrus) के जूस।
नारियल तेल, वनस्पति मोम, तिल के बीज और खसखस।
बेकरी उत्पाद और कोको (Cocoa) से बने सामान।
अन्य: आवश्यक तेल (Essential Oils), जिंक ऑक्साइड और घड़ियां।
चीन और बांग्लादेश के मुकाबले भारत को ‘बड़ी बढ़त’
पीयूष गोयल ने आंकड़ों के जरिए बताया कि अमेरिका ने भारतीय निर्यातकों को अन्य देशों की तुलना में कितनी बड़ी प्राथमिकता दी है:
मंत्री ने कहा, “हमारे निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी के साथ खुल गई है।”
भारतीय किसानों और संवेदनशील क्षेत्रों का रखा ध्यान
समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भारत ने अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत ने निम्नलिखित संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिका को कोई छूट नहीं दी है:
डेयरी उत्पाद: दूध, पनीर और घी पर कोई रियायत नहीं।
अनाज: गेहूं, चावल, मक्का और बाजरा के बाजार को सुरक्षित रखा गया है।
पोल्ट्री: मीट और चिकन उत्पादों पर कोई टैरिफ कटौती नहीं की गई है।
500 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य
यह वार्ता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी और मात्र एक साल के भीतर इस अंतरिम समझौते तक पहुंच गई। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के वार्षिक निर्यात को 500 अरब डॉलर के पार ले जाना है। पीयूष गोयल ने इस दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के नेतृत्व की सराहना की।