MP High Court Decision
MP High Court Decision : भोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट से एक ऐतिहासिक और बेहद खुश कर देने वाली खबर आई है। अदालत ने प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान कर्मचारियों के वेतन में की जाने वाली कटौती को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद साल 2019 के बाद भर्ती हुए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को काटी गई सैलरी एरियर के रूप में वापस मिलेगी।
“काम 100% तो सैलरी में कटौती क्यों?”
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ‘समान काम के लिए समान वेतन’ के सिद्धांत पर जोर दिया। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कर्मचारी प्रोबेशन पीरियड में अपना 100 प्रतिशत काम दे रहा है, तो फिर वेतन में 70, 80 या 90 प्रतिशत का नियम क्यों? कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के साल 2019 के उस सर्कुलर को भी रद्द कर दिया है, जिसके तहत नई भर्तियों के शुरुआती तीन सालों में वेतन कटौती का प्रावधान था।
कर्मचारियों को होगा लाखों का फायदा
अदालत के इस आदेश से कर्मचारियों की मानों लॉटरी लग गई है। ग्रेड और बेसिक पे के हिसाब से कर्मचारियों को 1.7 लाख रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक का एरियर (बकाया राशि) वापस मिलेगा।
जानिए किसे कितना मिलेगा अनुमानित एरियर:
-
तृतीय श्रेणी (₹36,200 बेसिक): लगभग ₹4,07,078 वापस मिलेंगे।
-
तृतीय श्रेणी (₹28,700 बेसिक): लगभग ₹3,23,258 का फायदा।
-
तृतीय श्रेणी (₹25,500 बेसिक): लगभग ₹2,85,085 की वापसी।
-
चतुर्थ श्रेणी (₹15,500 बेसिक): लगभग ₹1,74,840 का एरियर।
संवैधानिक जीत: रद्द हुआ 2019 का नियम
मध्य प्रदेश सरकार ने 2019 में नियम बनाया था कि नवनियुक्त कर्मचारियों को पहले साल 70%, दूसरे साल 80% और तीसरे साल 90% वेतन ही दिया जाएगा। अब कोर्ट ने इसे पूरी तरह अवैध ठहराते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि जिन भी कर्मचारियों का वेतन काटा गया है, उन्हें पूरी राशि ब्याज और एरियर सहित लौटाई जाए। इस फैसले से प्रदेश के उन हजारों युवाओं के चेहरे पर चमक आ गई है जो पिछले कुछ सालों में सरकारी सेवा से जुड़े हैं।