Road Safety Month 2026
Road Safety Month 2026 : विशेष संपादकीय : नए साल की शुरुआत के साथ ही पूरे देश सहित छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह’ की गूँज है। कहीं पुलिस हाथ जोड़कर फूल दे रही है, कहीं हेलमेट बांटे जा रहे हैं, तो कहीं खून देकर घायलों की जान बचाने का संकल्प लिया जा रहा है। दुर्ग से लेकर सरगुजा तक खाकी वर्दी सड़क पर पसीना बहा रही है ताकि आपकी जिंदगी सलामत रहे। लेकिन सवाल वही खड़ा है— क्या महज एक महीने की सख्ती, चंद चालान और औपचारिक शपथ से सड़कों पर बिछने वाली लाशों का सिलसिला थम जाएगा?
Road Safety Month 2026 : नियम हमारे लिए या हम नियमों के लिए?
हैरानी की बात है कि जिस हेलमेट और सीट बेल्ट को हमारी ‘सुरक्षा कवच’ होना चाहिए था, उसे हम ‘पुलिस से बचने का जरिया’ मान बैठे हैं। शहर के मुख्य चौक पर पुलिस को देखते ही हम हेलमेट पहन लेते हैं, लेकिन गली मुड़ते ही उसे उतारकर गाड़ी की डिक्की या हैंडल पर टांग देते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि सड़क पर मौत किसी वर्दी वाले को देखकर नहीं, बल्कि हमारी लापरवाही देखकर झपट्टा मारती है।
आखिर क्यों हेलमेट लगता है ‘बोझ’?
जनता के बीच एक अजीब सी मानसिकता घर कर गई है:
“बस थोड़ी दूर तो जाना है”: याद रखिए, दुर्घटना दूरी देखकर नहीं होती।
“बाल खराब हो जाएंगे”: क्या खराब बाल, फटी हुई खोपड़ी से ज्यादा कीमती हैं?
“दिखाई नहीं देता/गर्मी लगती है”: क्या आईसीयू (ICU) की पट्टियां और वेंटिलेटर की गर्मी इससे कम होगी?
हम नियमों को अपना ‘दुश्मन’ और पुलिस की सख्ती को ‘अत्याचार’ मानते हैं, जबकि असल दुश्मन हमारी वह बेपरवाही है जो हमें बिना हेलमेट और शराब पीकर तेज रफ्तार में वाहन चलाने को उकसाती है।
शपथ सिर्फ जुबान तक न रहे
प्रशासन हर साल आंकड़े जारी करता है—इतने हजार मौतें, इतने लाख घायल। इन आंकड़ों में कोई किसी का इकलौता बेटा होता है, तो कोई किसी घर का एकमात्र कमाने वाला। जब तक सड़क सुरक्षा हमारे लिए केवल एक ‘सरकारी आयोजन’ रहेगी, तब तक बदलाव नामुमकिन है। बदलाव तब आएगा जब एक पिता अपने बेटे को बिना हेलमेट घर से निकलने न दे, और एक दोस्त अपने दोस्त को शराब पीकर गाड़ी चलाने से रोके।
जिम्मेदारी आपकी भी है
पुलिस अपना काम कर रही है—चालान काट रही है, समझा रही है, और जागरूक भी कर रही है। लेकिन सड़क पर आपकी जान की रक्षा पुलिस का डंडा नहीं, बल्कि आपका ‘स्व-अनुशासन’ करेगा। याद रखिए, आपके घर के दरवाजे पर कोई आपकी सलामती का इंतजार कर रहा है। सड़क पर ‘शूरवीर’ नहीं, ‘जिम्मेदार नागरिक’ बनिए।
अगली बार जब आप बिना हेलमेट के बाइक स्टार्ट करें, तो एक पल रुककर अपने परिवार का चेहरा जरूर याद कर लीजिएगा। फैसला आपका है—नियम या यमराज?