Shani Pradosh Vrat 2026 : फरवरी महीने का प्रदोष व्रत इस बार बेहद खास होने जा रहा है। 14 फरवरी को शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने से ‘शनि प्रदोष’ का दुर्लभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष का व्रत रखने से न केवल भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, बल्कि कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव जैसे साढ़ेसाती और ढैय्या से भी मुक्ति मिलती है।
तिथि और शुभ मुहूर्त ज्योतिष गणना के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को दोपहर 4:01 बजे से शुरू होकर अगले दिन 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे समाप्त होगी। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय (प्रदोष काल) की जाती है, जिसका शुभ समय शनिवार शाम 6:10 बजे से रात 8:44 बजे तक रहेगा।
शनि की पीड़ा से मुक्ति के उपाय ज्योतिषियों के अनुसार, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन वरदान जैसा है। राहत पाने के लिए जातक शनिदेव को उड़द की दाल, काला तिल और लोहे की कील अर्पित करें। शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और ‘ॐ शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अलावा, हनुमान जी की पूजा करने से भी शनि दोष का प्रभाव कम होता है।
पूजा विधि और महत्व शनि प्रदोष के दिन सुबह जल्दी स्नान कर व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। उन्हें बेलपत्र, धतूरा और शमी के पत्ते चढ़ाएं। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती कर प्रसाद बांटें। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत करते हैं, उन्हें धन, वैभव और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह संयोग उन लोगों के लिए विशेष है जिनके कार्यों में लंबे समय से बाधाएं आ रही हैं।