UGC New Rules 2026 Protest : नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026/ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता नियम, 2026’ को लेकर देशभर में विरोध की आग सुलग उठी है। जनरल कैटेगरी और सवर्ण समाज के युवाओं का आक्रोश देखते हुए दिल्ली स्थित UGC हेडक्वार्टर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। इस बीच, कवि कुमार विश्वास ने भी सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए लिखा, “मैं अभागा सवर्ण हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।”
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दी सफाई बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मोर्चा संभालते हुए छात्रों और शिक्षकों को भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए नियम किसी भी प्रकार के भेदभाव को जन्म नहीं देंगे और न ही किसी को कानून का दुरुपयोग करने की इजाजत दी जाएगी। प्रधान ने कहा कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के अधीन और संविधान की सीमाओं के भीतर लिया गया है, जिसका उद्देश्य केवल शैक्षिक परिसरों में निष्पक्षता लाना है।
इस्तीफे और अनोखा विरोध विरोध की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, रायबरेली में भाजपा किसान नेता और गौ-रक्षा दल के अध्यक्ष ने सवर्ण सांसदों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियाँ भेजकर अपना विरोध दर्ज कराया है।
क्या है विवाद की असली वजह? UGC ने 15 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में इक्विटी कमेटी (Equity Committee) और इक्विटी स्क्वाड (Equity Squad) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इन नियमों में SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों पर संस्थान की फंडिंग रोकने और मान्यता रद्द करने जैसे कड़े प्रावधान हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि भेदभाव की नई परिभाषा और इन विशेष सेल्स के गठन से सवर्ण छात्रों और कर्मचारियों के खिलाफ कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाएगी, जो मानवाधिकारों (Human Rights) के लिहाज से चिंताजनक है।