इंफाल: मणिपुर में पिछले एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन आखिरकार समाप्त हो गया है। गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद, बीजेपी विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल अजय भल्ला ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
मेतई समुदाय से हैं नए मुख्यमंत्री 62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं और पेशे से इंजीनियर रहे हैं। वे बीरेन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं और उन्हें आरएसएस का करीबी माना जाता है। मंगलवार को दिल्ली में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया था। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की रेस में गोविंद दास और टी विश्वजीत सिंह के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन आलाकमान ने खेमचंद पर भरोसा जताया।
क्यों लगा था राष्ट्रपति शासन? मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। स्थिति को देखते हुए 13 फरवरी 2025 को एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू किया था, जिसे बाद में छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था।
सदन का गणित 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 37 विधायक हैं। इसके अलावा, एनडीए सहयोगी एनपीपी के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के 5 विधायकों का भी समर्थन सरकार को प्राप्त है। नई सरकार के सामने राज्य में शांति बहाली और विस्थापितों का पुनर्वास सबसे बड़ी चुनौती होगी।