- विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एंटीगुआ में CHOGM 2026 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के तकनीकी मॉडल को वैश्विक स्तर पर सराहा।
- डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (UPI, Aadhaar, DigiLocker) को विकासशील देशों के लिए डिजिटल और वित्तीय समावेश का मुख्य जरिया बताया गया।
- मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) और तकनीकी साझेदारी के जरिए भारतीय टेक स्टैक को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर।
कैरेबियन देश एंटीगुआ में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्ष बैठक (CHOGM 2026) के दौरान, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने देश की तकनीकी उपलब्धियों और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) का जोरदार प्रदर्शन किया। वैश्विक मंच पर भारत के इस तकनीकी मॉडल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कैसे किफायती, स्केलेबल और सुरक्षित डिजिटल समाधान लाखों-करोड़ों नागरिकों के जीवन को सुगम बना रहे हैं। भारतीय उपभोक्ताओं और वैश्विक तकनीकी बाजार के दृष्टिकोण से, यह पहल डिजिटल संप्रभुता और तकनीक के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
भारतीय संदर्भ में बात करें तो, यूपीआई (UPI), आधार और डिजिलॉकर जैसी प्रणालियों ने घरेलू स्तर पर वित्तीय और प्रशासनिक सेवाओं का कायापलट कर दिया है। अब वैश्विक दक्षिण (Global South) के देश भी भारत के इस DPI मॉडल को अपनाने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। इस सम्मेलन में यह स्पष्ट हो गया कि भविष्य का तकनीकी विकास केवल बड़े सॉफ्टवेयर दिग्गजों पर निर्भर नहीं होगा, बल्कि ओपन-सोर्स डिजिटल पब्लिक गुड्स पर आधारित होगा जो हर देश के नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचा सके।
ShaamNews संपादकीय फैसला: भारत का डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) अब सिर्फ एक घरेलू उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी कूटनीति का सबसे मजबूत हथियार बन चुका है। यह विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक नया ब्लूप्रिंट पेश करता है।
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भारत का डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर: ग्लोबल साउथ के लिए वरदान
भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सबसे बड़ी खूबी इसकी इंटरऑपरेबिलिटी और कम लागत है। एंटीगुआ में CHOGM 2026 के मंच से विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि कैसे आधार, यूपीआई और ओएनडीसी (ONDC) जैसी प्रणालियों ने देश के दूरदराज के इलाकों में वित्तीय समावेशन को संभव बनाया है। आज वैश्विक स्तर पर कई देश अपने नागरिकों को डिजिटल सेवाएं देने के लिए भारत के टेक स्टैक की तर्ज पर अपने सिस्टम विकसित कर रहे हैं। इससे भारतीय तकनीक की वैश्विक स्वीकार्यता में भारी बढ़ोतरी हुई है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) और टेक इकोनॉमी का भविष्य
डिजिटल अवसंरचना के साथ-साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) पर भी विशेष जोर दिया गया। आधुनिक व्यापार अब केवल भौतिक वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सॉफ्टवेयर, क्लाउड सर्विसेज, फिनटेक और एआई सॉल्यूशंस की बड़ी भूमिका है। भारत सरकार की नीतियां घरेलू टेक स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच प्रदान कर रही हैं, जिससे भारतीय सॉफ्टवेयर और डिजिटल सेवाओं का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है।
| विशेषताएँ (Feature) | भारतीय डिजिटल मॉडल (DPI) | पारंपरिक पश्चिमी मॉडल (Legacy Systems) | ShaamNews फैसला (Verdict) |
|---|---|---|---|
| लागत और रखरखाव (Cost) | अत्यंत किफायती (Open API Based) | महंगे और लाइसेंस-आधारित | भारत का मॉडल कहीं अधिक सुलभ |
| स्केलेबिलिटी (Scale) | अरबों ट्रांजैक्शन प्रति माह | सीमित और खंडित | भारत का पलड़ा भारी |
| वित्तीय समावेशन (Inclusion) | गाँव-गाँव तक डिजिटल भुगतान | बैंकिंग पहुंच पर निर्भर | क्रांतिकारी बदलाव |
| ग्लोबल अडॉप्टेबिलिटी | तेजी से अपना रहे विकासशील देश | प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर सीमाएं | वैश्विक दक्षिण में बेस्ट |
- ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर जो भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकता है।
- यूपीआई और आधार जैसे DPI की वैश्विक मान्यता और प्रशंसा।
- ग्लोबल साउथ के देशों के लिए तकनीकी कूटनीति का मजबूत माध्यम।
- एफटा (FTAs) के जरिए टेक स्टार्टअप्स को ग्लोबल मार्केट एक्सेस।
- विभिन्न देशों में डेटा सुरक्षा कानूनों के साथ समन्वय स्थापित करना चुनौतीपूर्ण।
- वैश्विक स्तर पर तकनीकी मानकों का मानकीकरण अभी भी शुरुआती चरण में है।
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