Hardoi Income Tax Notice
Hardoi Income Tax Notice : हरदोई। उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग (IT Department) के अजीबोगरीब नोटिसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला हरदोई जिले से सामने आया है, जहाँ एक दिहाड़ी मजदूर उस वक्त सन्न रह गया जब उसे विभाग की ओर से 7 करोड़ 15 लाख 92 हजार 786 रुपये का टैक्स नोटिस मिला। माधौगंज थाना क्षेत्र के रूदामऊ गांव के रहने वाले गोविंद कुमार के घर जब आयकर विभाग की टीम पहुंची, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
दस्तावेजों की जांच में जुटा विभाग जानकारी के मुताबिक, गोविंद कुमार को यह नोटिस 8 जनवरी को जारी किया गया था। इसके बाद 13 जनवरी को आयकर अधिकारियों की एक टीम गोविंद के घर पहुंची और उनके बैंक खातों से संबंधित दस्तावेजों की मांग की। नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि इस मामले की सुनवाई 20 जनवरी को होनी है। महज कुछ सौ रुपये रोज कमाने वाले मजदूर के लिए इतनी बड़ी रकम का नोटिस किसी सदमे से कम नहीं है। अब पूरा परिवार मानसिक तनाव और डर के साये में जीने को मजबूर है।
साजिश का शिकार हो रहे हैं आम लोग? यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक साल में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ किसान, जूस विक्रेता और संविदा कर्मचारियों को करोड़ों के नोटिस भेजे गए हैं:
मथुरा का किसान: अप्रैल 2025 में एक किसान को 30 करोड़ का नोटिस मिला। जांच में पता चला कि उसके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी नंबर और फर्म बनाई गई थी।
अलीगढ़ का संविदा कर्मचारी: बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 34 करोड़ का नोटिस थमाया गया।
स्प्रिंग कारीगर: अलीगढ़ के ही योगेश शर्मा, जो ताले की स्प्रिंग बनाकर गुजारा करते हैं, उन्हें 11 करोड़ का नोटिस मिला।
जूस विक्रेता: सराय रहमान के रईस को 7.79 करोड़ रुपये भरने का आदेश मिला।
मजदूर की पत्नी: मुरादाबाद में एक महिला को 1.4 करोड़ का नोटिस मिला, जिसने आशंका जताई कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हुआ है।
पैन कार्ड और डेटा चोरी का बड़ा खेल इन सभी मामलों में एक बात सामान्य है—पीड़ितों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। विशेषज्ञों का मानना है कि जालसाज गरीब और अनपढ़ लोगों के आधार और पैन कार्ड का डेटा चुराकर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां खोलते हैं और करोड़ों का ट्रांजेक्शन करते हैं। जब आयकर विभाग की नजर इन खातों पर पड़ती है, तो नोटिस असली दस्तावेज धारक के पास पहुंच जाता है।
फिलहाल हरदोई का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि 20 जनवरी की सुनवाई में विभाग गोविंद कुमार को राहत देता है या यह कानूनी उलझन और लंबी खिंचती है।
*कीमतें, बैंक कैशबैक व उपलब्धता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर समय के साथ बदल सकती हैं।
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