- देश के 8 प्रमुख हवाई अड्डों पर 'पिक्चर एग्नोस्टिक' फुल बॉडी स्कैनर इंस्टॉल किए जा रहे हैं।
- इस नई हाई-टेक तकनीक से सुरक्षा जांच अधिक तेज होगी और यात्रियों की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
- यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के और करीब लाता है।
भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। देश के 8 प्रमुख हवाई अड्डों पर अब अत्याधुनिक ‘पिक्चर एग्नोस्टिक’ फुल बॉडी स्कैनर लगाए जा रहे हैं। यह कदम न केवल हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच की गति को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि पारंपरिक फ्रिस्क-डिटेक्शन (शारीरिक तलाशी) की लंबी लाइनों से भी यात्रियों को राहत दिलाएगा। भारतीय यात्रियों और लगातार बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए यह अपग्रेड काफी समय से अपेक्षित था।
शारीरिक सुरक्षा और निजता (Privacy) के बीच हमेशा एक बारीक संतुलन बनाने की चुनौती रहती है। पारंपरिक स्कैनर्स को लेकर अक्सर यात्रियों की चिंताएं रहती थीं कि वे शरीर के अंगों को बहुत स्पष्ट रूप से दिखाते हैं, जिससे प्राइवेसी प्रभावित होती है। हालांकि, इन नए ‘पिक्चर एग्नोस्टिक’ स्कैनर्स में इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया है। ये स्कैनर यात्रियों की कोई भी वास्तविक तस्वीर या संवेदनशील छवि नहीं दिखाते, बल्कि एक सामान्य कंप्यूटर जनित अवतार (Avatars) का उपयोग करके संभावित छिपी हुई वस्तुओं को चिन्हित करते हैं।
ShaamNews एडिटोरियल फैसला: यह अपग्रेड भारतीय विमानन सुरक्षा को वैश्विक मानकों पर ले जाता है। प्राइवेसी की सुरक्षा और तेज़ चेक-इन का यह कॉम्बिनेशन हर भारतीय यात्री के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
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‘पिक्चर एग्नोस्टिक’ तकनीक कैसे काम करती है?
इन अत्याधुनिक स्कैनर्स के पीछे की तकनीक मिलीमीटर-वेव (Millimeter-wave) तकनीक पर आधारित है। जब कोई यात्री स्कैनर के भीतर कदम रखता है, तो यह तकनीक हानिरहित रेडियो तरंगों का उपयोग करती है जो कपड़ों के आर-पार चली जाती हैं और त्वचा से परावर्तित होकर वापस आती हैं। कंप्यूटर एल्गोरिदम इन परावर्तित संकेतों का विश्लेषण करके यह तुरंत पहचान लेता है कि कपड़ों के नीचे कोई धातु, गैर-धातु, विस्फोटक या तरल पदार्थ छिपाया गया है या नहीं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्क्रीन पर किसी भी व्यक्ति का वास्तविक शरीर दिखाई नहीं देता। इसके बजाय, एक मानकीकृत मानवीकृत आकृति (Avatar) पर संदिग्ध वस्तु का स्थान लाल घेरे के रूप में दर्शाया जाता है। इससे सुरक्षाकर्मियों को यह पता चल जाता है कि किस विशिष्ट हिस्से की दोबारा जांच करनी है, और यात्री की व्यक्तिगत गरिमा व प्राइवेसी पर भी कोई आंच नहीं आती।
भारतीय विमानन और यात्रियों पर इसका प्रभाव
भारत में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर पहुंच चुकी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों के एयरपोर्ट्स पर पीक आवर्स के दौरान सुरक्षा जांच के लिए लंबी कतारें आम बात हो गई हैं। पारंपरिक मैनुअल फ्रिस्कर्स में समय अधिक लगता है और मानवीय चूक की गुंजाइश भी बनी रहती है।
इन फुल बॉडी स्कैनर्स के आ जाने से प्रति यात्री जांच का समय घटकर मात्र कुछ सेकंड रह जाएगा। इसके अलावा, छिपी हुई वस्तुओं को पकड़ने की सटीकता में जबरदस्त सुधार होगा, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद और तस्करी जैसी असामाजिक गतिविधियों से निपटने में अभूतपूर्व बढ़त मिलेगी। भारतीय नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के दिशा-निर्देशों के तहत इन 8 हवाई अड्डों पर चरणबद्ध तरीके से इन्हें लागू किया जा रहा है।
| विशेषताएं (Features) | नया फुल बॉडी स्कैनर (New Scanners) | पारंपरिक मेटल डिटेक्टर (Traditional Check) | ShaamNews फैसला (Verdict) |
|---|---|---|---|
| जांच का समय (Scan Time) | 3 से 5 सेकंड प्रति यात्री | 15 से 30 सेकंड (मैनुअल तलाशी सहित) | बेहद तेज और कुशल |
| प्राइवेसी स्तर (Privacy Level) | पिक्चर एग्नोस्टिक (कोई वास्तविक तस्वीर नहीं) | शारीरिक स्पर्श (Physical frisking) | पूर्ण प्राइवेसी सुरक्षित |
| खतरों की पहचान (Threat Detection) | धातु और गैर-धातु (विस्फोटक, लिक्विड) दोनों | मुख्य रूप से धातु आधारित वस्तुएं | व्यापक और उन्नत सुरक्षा |
| लागत प्रभाव (Cost/Deployment) | उच्च इंफ्रास्ट्रक्चर लागत | कम लागत | लंबी अवधि में निवेश योग्य |
- यात्रियों के शारीरिक संपर्क (Physical frisking) की आवश्यकता समाप्त।
- गोपनीयता बनाए रखने के लिए असली तस्वीरों के बजाय केवल अवतार तकनीक का उपयोग।
- छिपे हुए गैर-धातु विस्फोटक और हथियारों का सटीक पता लगाने में सक्षम।
- चेक-इन और सुरक्षा कतारों में लगने वाले समय में भारी कमी।
- शुरुआती चरणों में यात्रियों को प्रक्रिया समझने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
- देश के सभी छोटे हवाई अड्डों तक इसके पूर्ण विस्तार में अभी समय लगेगा।
भारतीय बाजार व वैकल्पिक सुरक्षा उपाय
भारत सरकार लगातार विमानन सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है। इन फुल बॉडी स्कैनर्स के अलावा, डिजील यात्रा (DigiYatra) जैसी डिजिटल बायोमेट्रिक पहलें और आधुनिक बैगेज स्कैनर भी एयरपोर्ट्स पर जोड़े जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर के प्रमुख हवाई अड्डों पर यह तकनीक पहले से ही मानक है। भारत का यह कदम देश के एविएशन सेक्टर को वैश्विक स्तर के समकक्ष खड़ा करता है।
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